उफ़क साहिल

बाराबंकी:

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए अयोध्या और बाबरी ढांचे से जुड़े मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। अपने भाषण में उन्होंने स्पष्ट कहा कि “कयामत तक भी बाबरी ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं होगा” और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरी तरह संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है तथा इस मामले में देश की सर्वोच्च अदालत का फैसला अंतिम और सर्वमान्य है। उन्होंने यह भी कहा कि अब इस विषय पर किसी तरह का भ्रम फैलाने या विवाद खड़ा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें आज भी तुष्टिकरण की राजनीति के जरिए समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे चुनावी माहौल में दिया गया बयान बताया, जबकि भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों के नेताओं ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों और जनभावनाओं के अनुरूप करार दिया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है। इसका असर न केवल चुनावी रणनीतियों पर पड़ेगा, बल्कि प्रदेश की समग्र राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।

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