अरशी नाज़ 

पटना।

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आज पटना के गंगा घाट पर 23 साल बाद शटतिला एकादशी के साथ एक दुर्लभ खगोलीय संयोग बना, जिसके कारण गंगा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जो स्नान और दान करने के लिए उत्साहित थे, क्योंकि इस विशेष योग में भगवान विष्णु की कृपा पाने की मान्यता थी, जिससे धार्मिक महत्व और बढ़ गया था।
23 वर्षों बाद बने दुर्लभ खगोलीय संयोग के कारण इस वर्ष मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व रहा, जिसके चलते अहले सुबह से ही लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए दीघा घाट, कलेक्ट्रेट घाट, गांधी घाट और कंगन घाट पर पहुंचने लगे। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था।

हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे उत्तरायण काल की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस बार 23 वर्षों बाद बने दुर्लभ संयोग के कारण श्रद्धालुओं में गंगा स्नान को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।

सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु गंगा तटों पर जुटने लगे। लोगों ने पवित्र गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान किया। घाटों पर पूजा–अर्चना, मंत्रोच्चार और भजन–कीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। गंगा घाटों पर पुलिस बल, होम गार्ड, जल पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात रहीं। भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग की गई थी और घाटों पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें और एंबुलेंस भी मौजूद रहीं।

यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए शहर में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया था, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा घाटों का निरीक्षण भी किया गया और व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी गई।


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