धार्मिक परिवर्तन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सियासत से दूर रखने की सलाह

नई दिल्ली: देश में कथित धोखाधड़ी से होने वाले धार्मिक परिवर्तन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर गंभीर रुख अपनाया है। यह मामला वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को इस तरह के मामलों पर कड़े कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि कई जगहों पर लोगों को लालच, दबाव या झूठी जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है, जो कानून और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस मुद्दे को गंभीर बताया था और कहा था कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

साल 2023 में अदालत ने यह भी साफ किया था कि धार्मिक परिवर्तन का मामला बहुत संवेदनशील है और इसे किसी भी तरह की राजनीतिक रंगत नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट का मानना है कि इस तरह के मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने से समाधान निकालना और मुश्किल हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि इसे कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही देखा जाए।

इस मामले में अदालत ने भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से भी मदद मांगी थी, ताकि इस विषय पर सही कानूनी राय मिल सके और उचित दिशा में कदम उठाए जा सकें। अटॉर्नी जनरल का काम सरकार को कानूनी सलाह देना होता है, इसलिए उनकी राय इस मामले में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि अगर कहीं जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन हो रहा है, तो उसे रोकने के लिए सख्त कानून और उनका सही तरीके से पालन जरूरी है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपेक्षा की है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा करें।