सबा फ़िरदौस
राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर में प्रदूषण का संकट और गहराता जा रहा है। लोग लगातार जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। सोमवार सुबह दिल्ली घने स्मॉग की चादर में लिपटी नजर आई। सुबह करीब 7 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 402 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। कई इलाकों में AQI 450 से 500 के करीब पहुंचने की भी रिपोर्ट है।
घना कोहरा, गिरता तापमान और हवा की रफ्तार बेहद कम होने के कारण प्रदूषण के कण वातावरण में ही फंसे हुए हैं। इसका सीधा असर जनजीवन पर पड़ रहा है। सड़कों पर विजिबिलिटी कम होने से यातायात प्रभावित हुआ है, वहीं लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, खांसी और सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों को बंद कर दिया गया है या ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए हालात ज्यादा खतरनाक बने हुए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की जहरीली हवा लंबे समय तक शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने ग्रैप (GRAP) के तहत सख्त कदम उठाए हैं। निर्माण कार्यों पर रोक, डीजल वाहनों पर नियंत्रण और औद्योगिक गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाई गई है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और सावधानी बरतें।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव और तेज हवाएं चलने के बाद ही प्रदूषण से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। तब तक नागरिकों को सतर्क रहकर ही इस संकट का सामना करना होगा।
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