सबा फिरदौस
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने ईरान की मौजूदा स्थिति पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि वहां की सत्ता अब अपने अंतिम दौर में पहुंच रही है। इस पर ईरान के विदेश मंत्री ने प्रतिक्रिया देते हुए जर्मनी के बयान को देश के आंतरिक मामलों में गैरकानूनी दखल बताया।
मंगलवार को ईरान में लोगों को अंतरराष्ट्रीय फोन कॉल करने की अनुमति मिली, जो विरोध प्रदर्शनों के दौरान संचार सेवाएं बंद किए जाने के बाद पहली बार हुआ। रॉयटर्स से बातचीत में एक ईरानी अधिकारी ने दावा किया कि इस अशांति के दौरान करीब 2,000 लोगों की मौत हुई है, जबकि सरकार ने इन मौतों के लिए “आतंकवादी तत्वों” को जिम्मेदार ठहराया।
तेहरान ने यह भी साफ किया कि अमेरिका के साथ बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों पर की गई सख्त कार्रवाई को लेकर अपने अगले कदम पर विचार कर रहे हैं। इन हालात को 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
महंगाई और आर्थिक परेशानियों को लेकर दो हफ्ते पहले शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है। यह प्रदर्शन अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है, जैसा कि 1979 में शाह के खिलाफ आंदोलन के दौरान देखा गया था।
ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसके अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। ट्रंप ने इसे अंतिम फैसला बताया, लेकिन इसके कानूनी पहलुओं पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। व्हाइट हाउस की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा है कि देश हर स्थिति के लिए तैयार है, चाहे वह युद्ध हो या बातचीत। उनका कहना है कि धमकियों के बावजूद ईरान अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा।
मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक 646 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इसके अलावा 10 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कई अन्य मौतों की जांच अभी जारी है। वहीं ईरानी अधिकारियों का दावा है कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक है।
प्रदर्शनों के बीच सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं, जो तीन दिनों से ज्यादा समय से जारी हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कदम कार्रवाई की असली स्थिति को दुनिया से छिपाने के लिए उठाया गया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि अमेरिका के साथ पर्दे के पीछे संपर्क बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सीधे राजनयिक संबंध न होने के कारण स्विट्जरलैंड के माध्यम से जरूरी संदेशों का आदान-प्रदान किया जा रहा है।
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