रेहान फ़ज़ल

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को आज 18 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक इन प्रदर्शनों में 2,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शन, आगजनी और झड़पों की घटनाएं सामने आ रही हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज़ होने से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक मामला 26 वर्षीय युवक इरफान सुल्तानी का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इरफान को 8 जनवरी को प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ईरानी सरकार ने 11 जनवरी को उन्हें दोषी करार देते हुए बताया कि उन पर ‘मोहारेबेह’ (ईश्वर के खिलाफ युद्ध छेड़ने) का आरोप लगाया गया है। खबर है कि आज उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दी जा सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इरफान को न तो किसी निष्पक्ष अदालत में सुनवाई का पूरा अवसर मिला और न ही उन्हें उचित कानूनी सहायता दी गई। इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता जताई है।

इधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने ईरान सरकार से संयम बरतने और मानवाधिकारों का सम्मान करने की अपील की है।

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