सबा फिरदौस

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और हालात और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRAI) के अनुसार, 28 दिसंबर से अब तक कम से कम 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 16,700 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसे हाल के वर्षों में ईरान का सबसे घातक आंतरिक संकट माना जा रहा है।

शुरुआत में ये प्रदर्शन महंगाई, आर्थिक बदहाली और ईरानी मुद्रा के तेजी से गिरने के खिलाफ थे, लेकिन अब यह आंदोलन धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। ईरान के बाहर भी इसका असर दिख रहा है। यूरोप के कई शहरों, खासकर स्पेन के बार्सिलोना में, लोग ईरानी झंडे लहराकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सड़कों पर उतरे।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज हुई या उन्हें फांसी दी गई, तो अमेरिका “बहुत कड़ा कदम” उठा सकता है। ट्रंप ने बताया कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ हालात की समीक्षा कर रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कितने लोग मारे गए और कितनों को गिरफ्तार किया गया है। उनके अनुसार, हत्याओं का स्तर “बेहद गंभीर” है और अमेरिका उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देगा।

HRAI का दावा है कि उसके आंकड़े ईरान के अंदर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के जरिए सत्यापित किए जाते हैं और मरने वालों में बड़ी संख्या आम प्रदर्शनकारियों की है। वहीं, ईरान सरकार ने इन आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा है कि हिंसा को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

इस बीच, तेहरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह सैन्य हस्तक्षेप के लिए माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी सरकार ने ट्रंप के बयानों को देश के आंतरिक मामलों में अवैध दखल बताया है।

कुल मिलाकर, ये प्रदर्शन ईरान के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं, जहां आर्थिक संकट और जनता का गुस्सा सरकार पर लगातार दबाव बढ़ा रहा है।

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