उफ़क साहिल

ISRO का PSLV-C62 रॉकेट लॉन्च के शुरुआती पलों में तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ा, लेकिन उड़ान के लगभग आठ मिनट बाद मिशन में रुकावट आ गई। समस्या रॉकेट के तीसरे स्टेज (PS3) में सामने आई, जो ठोस ईंधन से संचालित होता है और रॉकेट को अंतिम वेग देने का काम करता है।

एजेंसी के उड़ान आंकड़ों के अनुसार, तीसरे स्टेज के दौरान रॉकेट का संतुलन बिगड़ गया। रोल रेट में असामान्य बदलाव देखा गया और रॉकेट अपने निर्धारित उड़ान मार्ग से भटकने लगा। इसी दौरान इंजन में जरूरी चेंबर प्रेशर बनाए रखने में असफलता रही, जिससे रॉकेट अपेक्षित गति और दिशा हासिल नहीं कर सका।

इस तकनीकी बाधा के कारण मिशन का उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। मुख्य पेलोड अन्वेषा (EOS-N1) सहित 15 अन्य उपग्रह अपनी तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाए।

शुरुआती स्टेज सफल, तीसरे में आई अड़चन

जानकारी के मुताबिक, रॉकेट के पहले और दूसरे स्टेज ने सामान्य रूप से काम किया। गड़बड़ी सिर्फ तीसरे स्टेज तक सीमित रही, लेकिन उसी ने पूरे मिशन को प्रभावित कर दिया।

क्यों बढ़ी ISRO की चिंता?

PSLV-C62 की असफलता इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले PSLV-C61 (मई 2025) मिशन में भी तीसरे स्टेज से जुड़ी इसी तरह की समस्या सामने आई थी। उस मिशन में भी चेंबर प्रेशर में गिरावट के कारण EOS-09 उपग्रह सही ऑर्बिट तक नहीं पहुंच सका था।

लगातार दो अभियानों में समान तकनीकी खामी सामने आने के बाद ISRO अब तीसरे स्टेज के डिज़ाइन, निर्माण प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण की विस्तृत समीक्षा करने की तैयारी में है।

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