महिला आरक्षण और परिसीमन बिल आज संसद में पेश, सरकार के सामने संख्या की बड़ी चुनौती
नई दिल्ली: आज संसद में देश की राजनीति को नई दिशा देने वाले अहम और ऐतिहासिक विधेयक पेश किए जाने वाले हैं। केंद्र सरकार महिला आरक्षण, परिसीमन (Delimitation) और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बिल संसद के दोनों सदनों में पेश करेगी। इन विधेयकों का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना और चुनावी क्षेत्रों का नए सिरे से पुनर्गठन करना है।
सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया जाए। इस कानून को “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के नाम से जाना जाता है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की जाएंगी, जिससे महिला प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, इस कानून को सीधे लागू नहीं किया जाएगा। इसे परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। यानी पहले जनगणना के आंकड़ों के आधार पर देश के चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को दोबारा तय किया जाएगा, और उसके बाद ही महिला आरक्षण लागू होगा। सरकार फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।
इनमें से दो विधेयक संविधान संशोधन से जुड़े हैं, जिन्हें पारित कराने के लिए संसद में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ है कि सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई का समर्थन जरूरी होगा। ऐसे में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम हो जाती है, क्योंकि किसी भी तरह का वॉकआउट या मतदान से दूरी बहुमत के समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
लोकसभा में वर्तमान प्रभावी सदस्य संख्या 541 है, जहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट जरूरी हैं। सत्ताधारी NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के पास फिलहाल 293 सदस्य हैं, यानी उसे 67 वोटों की कमी है।
राज्यसभा में भी स्थिति सरकार के लिए आसान नहीं है। यहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 वोटों की जरूरत है, जबकि NDA के पास लगभग 142 सदस्य हैं, यानी यहां भी 21 वोटों की कमी बनी हुई है।
ऐसे में यदि विपक्ष एकजुट होकर इन विधेयकों का विरोध करता है, तो सरकार के लिए इन्हें पारित कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए सरकार को न सिर्फ अपनी रणनीति मजबूत करनी होगी, बल्कि विपक्षी दलों का समर्थन भी हासिल करना होगा।
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Navidul Hasan
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