अरशी नाज़
भभुआ (कैमूर),
वसंत ऋतु के आगमन और विद्या की देवी मां सरस्वती के पूजन के पावन अवसर पर गुरुवार को भभुआ स्थित लिच्छवी भवन में ‘वसंत पंचमी महोत्सव–2026’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर लोक कला, संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया।
महोत्सव का उद्घाटन जिलाधिकारी सुनील कुमार एवं पुलिस अधीक्षक कैमूर द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में अपर समाहर्ता, नजारत उप समाहर्ता, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सहित जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी और शहर के नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुई। इस अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि वसंत पंचमी केवल शिक्षा और परीक्षा से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें ज्ञान के साथ विनम्रता और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि लोक परंपराओं से जुड़े ऐसे आयोजनों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित संगीत संध्या में जिले के लगभग 150 कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। भभुआ के मनिहारी-कम्हारी विद्यालय की छात्राओं ने मधुर लोकगीत प्रस्तुत किए, जबकि रामगढ़ के नोनार विद्यालय के छात्रों ने ‘झांसी की रानी’ थीम पर आधारित साहसी लोकनृत्य से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
रामपुर प्रखंड के पसाई विद्यालय के बच्चों ने ‘सुंदर सुभूमि हमारा है’ गीत पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर देश की एकता और विविधता का संदेश दिया। वहीं भभुआ के महेसुआ विद्यालय के छात्र साहिल मियां ने कृष्ण भजन ‘आया करे जरा कह दो सावरिया से’ की सुंदर प्रस्तुति दी। इसके अलावा मोहनियाँ की आदिस्वरूपा मौर्या ने सितार वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस महोत्सव में भभुआ, मोहनियाँ, रामगढ़, चैनपुर और रामपुर प्रखंडों के विभिन्न विद्यालयों ने भाग लिया। कक्षा 4 से 12 तक के विद्यार्थियों ने मंच पर अपनी कला दिखाई, जिसमें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं की देशभक्ति गीत प्रस्तुति विशेष रूप से सराही गई। कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन की ओर से सभी प्रतिभागी कलाकारों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और लुप्त होती लोक कलाओं को संरक्षण प्रदान करना है।
ओमहोत्सव का समापन +2 उच्च विद्यालय भभुआ के छात्रों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक होली गीत से हुआ। जैसे ही कलाकारों ने ‘फगुआ’ की तान छेड़ी, पूरा लिच्छवी भवन वसंत और उल्लास के रंग में सराबोर हो गया।
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