क्यों होता है है महिलाओं का खतना ?
खतना शब्द सुनते ही ज़ेहन में एक समुदाय की एक परम्परा का चित्र रेखांकित होता है। मुस्लिम ईसाई और यहूदी समुदायों में यह परम्परा प्रचलित है।
मुस्लिम समाज में खतना कराने की प्रक्रिया को सुन्नत कराना भी कहा जाता है। खतना इस्लाम धर्म का अहम हिस्सा नहीं है मगर खतना कराने के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण बताये जाते हैं। खतना कराने की पीछे यह तर्क दिया जाता है कि खतना कराने से परुषों में लिंग कि बिमारी ख़तम हो जाती है। कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि खतना से लिंग के कैंसर का खतरा जीरो हो जाता है। अब तक तो मुसलमान समुदाय के पुरुषों के खतना के बारे में सूना गया है लेकिन क्या कभी आपने महिलाओं के खतना के बारे में सुना है?अगर नहीं सूना है तो आज हम आपको इस लेख के माध्यम से यह बताने की कोशिश करेंगे कि महिलाओं का खतना क्यों होता है और कैसे होता है महिलाओं का खतना।
क्या होता है महिलाओं का खतना?
महिला जननांग एवं महिला जननांग विकृति (एफ़जीएम) एक गैर-चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें योनी (Vegina) के कुछ को हिस्सों को काट कर हटा दिया जाता है। यह प्रथा अफ़्रीका, एशिया, और मध्य पूर्व जैसे कुछ देशों में आम हैं।
महिलाओं के खतना कि प्रक्रिया
महिलाओं का खतना योनि के आगे वाले हिस्से हिस्से को ब्लेड से काटकर किया जाता है। जन्म के कुछ दिनों के बाद से लेकर यौवनारंभ तक और उसके बाद भी किसी भी उम्र में की जाने वाली प्रक्रिया है। आधे से अधिक मामलों में पांच साल से पहले ही यह प्रक्रिया की जाती है।
महिलाओं का खतना कैसे किया जाता है?
अलग-अलग देशों और समाजों में अलग-अलग तरीके से किया जाता है। आम तौर पर यह परंपरागत तारीके से ही किया जाता है। कभी-कभी क्लिटोरल हुड और क्लिटोरल ग्लान्स को काट दिया जाता है, कभी-कभी आंतरिक लेबिया को काट दिया जाता है। कभी-कभी आंतरिक और बाहरी लेबिया को काटकर भग को बंद कर दिया जाता है। अगर योनि को बंद किया जाता है, तो मूत्र त्याग करने और मासिक धर्म के दौरान निकलने वाले द्रव के लिए एक छोटा छिद्र छोड़ दिया जाता है।
इसका होता रहा है विरोध।
इस्लामी देशों में महिलाओं के खतना के विरुद्ध कई बार आवाज़ उठती रही है। कई देशों में इसे कानूनी रूप से स्वीकृति नहीं है। सऊदी अरब जैसे अन्य मुस्लिम देशों में महिला खतना की प्रथा बिल्कुल नहीं है।
इस बात को ध्यान में रखते हुए, दार अल-इफ्ता ने नवंबर 2006 में एफजीएम के विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इसमें भाग लेने वालों में वैज्ञानिक, इस्लामी कानून विशेषज्ञ, इस विषय पर विशेषज्ञ शोधकर्ता और मिस्र तथा दुनिया भर के नागरिक अधिकार संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए । विभिन्न क्षेत्रों से प्रस्तुतियों की एक श्रृंखला सुनने के बाद, सम्मेलन ने निष्कर्ष निकाला गया कि मिस्र, अफ्रीका और अन्य जगहों के कुछ हिस्सों में वर्तमान में प्रचलित विकृति एक निंदनीय प्रथा है जिसका इस्लाम के आधिकारिक स्रोतों, कुरान और पैगंबर मुहम्मद के अभ्यास में कोई औचित्य नहीं है।
इस्लामी कानून के सर्वोच्च मूल्यों में से एक पैगंबर का आदेश है कि न तो किसी को नुकसान पहुँचाएँ और न ही किसी को नुकसान पहुँचाने की अनुमति हो । यह अनिवार्यता गैर-मुसलमानों के लिए स्वर्णिम नियम के रूप में जानी जाएगी। चूँकि यह एक सार्वभौमिक आदेश है। महिला खतना के कारण युवा लड़कियों (और बाद में महिलाओं) को होने वाले महत्वपूर्ण शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान के कारण, इस अस्वीकार्य परंपरा को रोकने के लिए सभी उपाय किए जाने चाहिए।
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