शाइस्ता आज़मी
तावड़ू (हरियाणा) क्षेत्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने लोगों की चिंता और दहशत को काफी बढ़ा दिया है। बीते महज तीन दिनों में कुत्तों के हमलों में 62 लोग घायल हो चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई मोहल्लों में बच्चों का अकेले घर से बाहर निकलना अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह और शाम के समय कुत्तों के झुंड गलियों, सड़कों और खाली प्लॉटों में घूमते नजर आ रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों, दूध लेने निकले लोगों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई परिवारों ने डर के कारण बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है या उन्हें घर से बाहर केवल बड़ों के साथ ही जाने की अनुमति दी जा रही है।कुत्तों के काटने के मामलों में बढ़ोतरी के बाद तावड़ू के सरकारी अस्पताल और निजी क्लीनिकों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार, हर दिन बड़ी संख्या में लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते के काटने की स्थिति में तुरंत घाव को साफ पानी से धोएं और बिना देर किए अस्पताल पहुंचें।लगातार हो रहे हमलों के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। नगर पालिका और प्रशासन से मांग की जा रही है कि कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और सुरक्षित शेल्टर की व्यवस्था तुरंत की जाए।सबसे ज्यादा डर बच्चों को लेकर है। कई कॉलोनियों में माता-पिता ने आपसी सहमति से यह फैसला लिया है कि बच्चे बिना किसी बड़े के बाहर नहीं निकलेंगे। कुछ जगहों पर तो बच्चों के खेलने पर भी रोक लगा दी गई है। अभिभावकों का कहना है कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक वे कोई जोखिम नहीं लेना चाहते।प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित इलाकों में आवारा कुत्तों की पहचान कर कार्रवाई करें। साथ ही, लोगों को जागरूक करने के लिए मुनादी और सूचना अभियान चलाने की भी बात कही गई है।
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