रेहान फ़ज़ल
सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े एक अहम मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्राओं के लिए अलग और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था के साथ-साथ सेनेटरी पैड की उपलब्धता उनकी गरिमा, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा मामला है।
अदालत ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे इस व्यवस्था को तीन महीने के भीतर लागू करें। कोर्ट ने माना कि स्कूलों में सेनेटरी सुविधाओं की कमी के कारण कई लड़कियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है, जो समानता और शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मासिक धर्म से जुड़ी स्वच्छता कोई सुविधा नहीं बल्कि बुनियादी आवश्यकता है और इसे सुनिश्चित करना सरकारों और शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है।
यह फैसला लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
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