उफ़क साहिल

लोकसभा में सरकार ने जानकारी दी कि साल 2016 से अब तक सुप्रीम कोर्ट और देश के हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ 8600 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं। सरकार ने कहा कि इनमें से अधिकतर शिकायतें जांच में सही नहीं पाई गईं।

कानून मंत्रालय के अनुसार, जजों के खिलाफ शिकायतों की जांच तय नियमों के अनुसार की जाती है। सुप्रीम कोर्ट के जजों के मामले में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जांच देखते हैं। वहीं हाईकोर्ट के जजों की शिकायतों की शुरुआती जांच संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस करते हैं।

अगर किसी शिकायत में पहली नजर में गंभीर बात सामने आती है, तो आगे जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर इन-हाउस प्रक्रिया के तहत समिति बनाकर मामले की पड़ताल की जाती है।

लिखित शिकायत दी जाती है।

चीफ जस्टिस स्तर पर शुरुआती जांच होती है।

सबूतों की जांच के बाद तय होता है कि मामला आगे बढ़ेगा या नहीं।

गंभीर मामलों में विशेष जांच समिति बनाई जा सकती है।

संसद में विपक्ष ने पूछा कि क्या किसी जज पर सख्त कार्रवाई हुई है। सरकार ने जवाब दिया कि कुछ मामलों में चेतावनी या सलाह दी गई है, और कुछ जजों ने इस्तीफा भी दिया है। महाभियोग की प्रक्रिया बहुत गंभीर मामलों में ही अपनाई जाती है।

सरकार ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसकी गरिमा बनाए रखते हुए ही शिकायतों पर कार्रवाई की जाती है

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