पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ऐन पहले I-PAC के सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई इस कार्रवाई को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है।
ED ने 13 अप्रैल को मनी लॉन्ड्रिंग और कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामले में चंदेल को गिरफ्तार किया। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें 10 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया। एजेंसी का आरोप है कि I-PAC के जरिए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन, हवाला चैनल और नकद फंडिंग का इस्तेमाल किया गया, जिसका उद्देश्य चुनावी गतिविधियों और जनमत को प्रभावित करना था।
TMC का आरोप: एजेंसियों का दुरुपयोग
तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को सीधे तौर पर राजनीतिक कदम करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की गिरफ्तारी निष्पक्ष प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है। TMC के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है।
पार्टी का यह भी दावा है कि ऐसे मामलों में सजा दर बेहद कम है, जिससे यह संदेह और गहराता है कि कार्रवाई का समय राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
अभिषेक बनर्जी का बयान:
TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने इसे “डर का माहौल बनाने की कोशिश” बताया। उनके अनुसार, जो भी विपक्ष के साथ खड़ा होगा, वह जांच एजेंसियों के निशाने पर आ सकता है।
BJP और वाम का पलटवार:
दूसरी ओर, BJP और वाम दलों ने ED की कार्रवाई का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह गिरफ्तारी लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में अहम कदम है।
BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि I-PAC सिर्फ एक राजनीतिक सलाहकार नहीं, बल्कि कथित तौर पर अवैध फंडिंग को छिपाने का माध्यम बन गया था। वहीं वाम दलों ने भी इसे “शेल नेटवर्क” बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, I-PAC के जरिए फंड्स को बैंकिंग और कैश चैनलों में विभाजित कर उनकी वास्तविक प्रकृति छिपाई गई। करीब 3.5 करोड़ रुपये को फर्जी लोन के रूप में दिखाकर वैध बनाने का प्रयास किया गया, जबकि कुल लेन-देन 50 करोड़ रुपये तक होने की आशंका जताई जा रही है।
यह मामला PMLA के तहत दर्ज किया गया है और इसकी जड़ें दिल्ली पुलिस की FIR से जुड़ी हैं।
