उफ़क साहिल

देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा पाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। भगीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त के मामलों में अचानक इज़ाफा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की लैब रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि सप्लाई किया जा रहा पानी पीने लायक नहीं था।

अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे ज़्यादा असर बच्चों, बुज़ुर्गों और महिलाओं पर देखा जा रहा है। कई मरीज गंभीर डिहाइड्रेशन की हालत में भर्ती कराए गए हैं। जांच में पानी में तय मानकों से अधिक हानिकारक तत्व पाए गए हैं।

रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर निगम ने प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई रोकने का दावा किया है और वैकल्पिक व्यवस्था की बात कही जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि समय रहते पानी की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हुई और इतनी बड़ी लापरवाही किसकी जिम्मेदारी है।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को उबला या फ़िल्टर किया हुआ पानी पीने की सलाह दी है। वहीं प्रभावित परिवार अब सिर्फ़ इलाज नहीं, बल्कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

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