खुशबू खातून
नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे ने अपनी वर्षों पुरानी परंपरा में बदलाव करते हुए रिटायर होने वाले कर्मचारियों को दिया जाने वाला गोल्ड प्लेटेड चांदी का मेडल बंद करने का फैसला किया है। यह परंपरा करीब दो दशकों से चली आ रही थी, जिसके तहत सेवा से निवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप यह विशेष मेडल प्रदान किया जाता था।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय खर्च में कटौती और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अब रिटायर होने वाले कर्मचारियों को मेडल के स्थान पर प्रशस्ति पत्र या अन्य स्मृति चिन्ह दिए जाने पर विचार किया जा रहा है।
इस फैसले के बाद कई कर्मचारियों और रेलवे यूनियनों में नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यह मेडल सिर्फ एक वस्तु नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और सेवा का प्रतीक था। रिटायरमेंट के समय मिलने वाला यह सम्मान कर्मचारियों के लिए भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होता था।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि कर्मचारियों के सम्मान में कोई कमी नहीं की जाएगी, बल्कि उन्हें अन्य माध्यमों से सम्मानित किया जाएगा। भविष्य में रिटायरमेंट कार्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित और डिजिटल स्वरूप में आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा नियोक्ता संस्थान है, जहां हर साल हजारों कर्मचारी सेवा से निवृत्त होते हैं। ऐसे में यह फैसला बड़ी संख्या में कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।
रेलवे मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय आर्थिक अनुशासन और नीतिगत सुधारों के तहत लिया गया है और इसका उद्देश्य कर्मचारियों की गरिमा को कम करना नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाना है।
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