नवीदुल हसन
भारत और यूरोपीय संघ के बीच बड़ा व्यापार समझौता, दोनों को मिलेगा फायदा
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुआ नया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस समझौते को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ज्यादा टैरिफ (शुल्क) लगाने वाली नीति के मुकाबले एक वैकल्पिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत को अपने ज़्यादातर सामान पर टैक्स में बड़ी राहत देगा। EU अपने 96.6 प्रतिशत सामान पर भारत में लगने वाले टैक्स को या तो पूरी तरह खत्म करेगा या काफी हद तक कम करेगा। इससे यूरोपीय कंपनियों को हर साल लगभग 4 अरब यूरो की बचत होने की उम्मीद है।
भारत को भी इस समझौते से बड़ा फायदा मिलेगा। शुरुआत में ही भारत के 90 प्रतिशत सामान पर टैक्स हटा दिया जाएगा, जो अगले सात सालों में बढ़कर 93 प्रतिशत तक हो जाएगा।
इसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। भारत में यूरोपीय कारें, वाइन और प्रोसेस्ड फूड जैसे पास्ता और चॉकलेट की कीमतें धीरे-धीरे कम हो सकती हैं, क्योंकि इन पर लगने वाला भारी टैक्स चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच “साझेदारी का बेहतरीन उदाहरण” बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। साथ ही यह ब्रिटेन और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के साथ पहले से मौजूद समझौतों को भी आगे बढ़ाता है।
इस बीच अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने आरोप लगाया कि रूस के साथ भारत का व्यापार यूक्रेन युद्ध को आर्थिक रूप से समर्थन देता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और EU के बीच यह नई साझेदारी बनी है। उन्होंने कनाडा को लेकर भी चेतावनी दी कि अमेरिका यह नहीं चाहता कि कनाडा के रास्ते चीन का सस्ता सामान अमेरिकी बाजार में पहुंचे।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर साफ कहा कि भारत सभी बड़े देशों के साथ रिश्ते रखता है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वह भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर रोक लगाए। जयशंकर के अनुसार, भारत की नीति “रणनीतिक स्वायत्तता” पर आधारित है।
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