उफ़क साहिल
नई दिल्ली:
ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास में शामिल न होने पर भारत सरकार ने कहा है कि इस फैसले का ब्रिक्स देशों के साथ संबंधों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। सरकार के मुताबिक यह अभ्यास ब्रिक्स का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि दक्षिण अफ्रीका द्वारा आयोजित किया गया एक स्वतंत्र आयोजन था।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत ब्रिक्स के तहत सहयोग को महत्व देता है, लेकिन हर सैन्य अभ्यास में भाग लेना जरूरी नहीं होता। भारत अपने राष्ट्रीय हित और रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए ऐसे फैसले लेता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी विदेश नीति में स्वतंत्र निर्णय लेने की परंपरा का पालन करता है। इसी कारण वह अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में अपनी भागीदारी तय करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक क्षेत्रों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत बनी हुई है।
सरकार का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात में भारत संतुलित और सोच-समझकर फैसले ले रहा है, और ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास से दूरी बनाना इसी नीति का हिस्सा है।
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