नवीदुल हसन
PSLV रॉकेट फेल होने के बाद भी एक सैटेलाइट ने अंतरिक्ष से भेजा डेटा
इसरो (ISRO) के PSLV-C62 रॉकेट की लॉन्चिंग के दौरान एक बड़ी तकनीकी खराबी सामने आई। रॉकेट के तीसरे चरण (थर्ड स्टेज) में गड़बड़ी आने के कारण यह मिशन अपने तय लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। इस हादसे में भारत और कई अन्य देशों के कुल 15 सैटेलाइट्स नष्ट हो गए। इनमें भारत का मुख्य सैटेलाइट EOS-N1 (अन्वेषा) भी शामिल था।
हालांकि, इस असफल मिशन के बीच एक अच्छी और चौंकाने वाली खबर भी सामने आई। स्पेन का एक छोटा सैटेलाइट, जिसका नाम KID (Kestrel Initial Demonstrator) है, सभी मुश्किलों के बावजूद कुछ समय के लिए काम करता रहा। यह फुटबॉल के आकार का और करीब 25 किलो वजनी सैटेलाइट था।
रॉकेट में आई खराबी के बावजूद यह सैटेलाइट PSLV के चौथे चरण से अलग हो गया और करीब 3 मिनट तक अंतरिक्ष से अहम डेटा पृथ्वी पर भेजने में सफल रहा। सैटेलाइट बनाने वाली कंपनी Orbital Paradigm ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी और बताया कि सैटेलाइट चालू हुआ और उसने जरूरी तकनीकी जानकारी भेजी।
कंपनी के अनुसार, KID सैटेलाइट ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इस दौरान इसे लगभग 28 गुना गुरुत्वाकर्षण बल (28g) और अत्यधिक गर्मी झेलनी पड़ी, जो आम तौर पर किसी भी प्रयोगात्मक उपकरण को नष्ट कर सकती है। फिर भी सैटेलाइट ने आंतरिक तापमान और अन्य जरूरी आंकड़े रिकॉर्ड किए।
यह सैटेलाइट खास तौर पर पुनः पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश (री-एंट्री) की तकनीक को जांचने के लिए बनाया गया था। इसे फ्रांस की कंपनी RIDE के सहयोग से विकसित किया गया है। यह तकनीक भविष्य में सैटेलाइट की मरम्मत, सर्विसिंग और सुरक्षित तरीके से उन्हें अंतरिक्ष से हटाने में मददगार साबित हो सकती है।
इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि तीसरे चरण के अंत में रॉकेट के रास्ते में गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण मिशन को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। पहले माना जा रहा था कि सभी सैटेलाइट नष्ट हो गए हैं, लेकिन KID सैटेलाइट ने कुछ समय तक सिग्नल भेजकर सबको चौंका दिया।
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