सबा फिरदौस
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। देश कई वर्षों के सबसे गंभीर जन आंदोलन का सामना कर रहा है, जहां बढ़ती महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब सीधे इस्लामिक रिपब्लिक को हटाने की मांग में बदल गए हैं।
इन प्रदर्शनों की शुरुआत तेहरान के बाजारों से हुई थी, जब खाने-पीने की चीजों के दाम अचानक बढ़ गए। अब यह आंदोलन केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। ईरान के सभी 31 प्रांतों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जबकि सरकार ने सुरक्षा कार्रवाई को और सख्त कर दिया है और इंटरनेट ब्लैकआउट भी लागू कर दिया गया है।
‘सुरक्षा पर रेड लाइन’: रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की चेतावनी
जैसे-जैसे हालात बिगड़ रहे हैं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और सेना ने सुरक्षा को लेकर “रेड लाइन” खींच दी है। सेना ने कहा है कि वह देश के राष्ट्रीय हितों, रणनीतिक ढांचे और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेगी। साथ ही नागरिकों से “दुश्मन की साजिशों” के प्रति सतर्क रहने की अपील की गई है।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक कम से कम 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका ईरान पर “बहुत सख्त” कार्रवाई कर सकता है।
सुप्रीम लीडर का सख्त रुख
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी ताकतों के लिए काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने संकेत दिया है कि सरकार इस स्थिति पर कड़ा और निर्णायक कदम उठाएगी।
फिलहाल ईरान एक गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है, जहां विरोध प्रदर्शन थमने के बजाय और तेज होते जा रहे हैं।
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