अदनान आलम
तेहरान: ईरान की कमजोर होती अर्थव्यवस्था और लगातार गिरते ईरानी रियाल ने देश को गंभीर आर्थिक संकट में धकेल दिया है। डॉलर की बेकाबू कीमतों के कारण तेहरान समेत कई बड़े शहरों में बाजार पूरी तरह बंद हो गए, जिसके बाद व्यापारियों और दुकानदारों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। हालात को संभालने के लिए ईरान सरकार ने टैक्स नियमों में बड़े बदलावों का ऐलान किया है।
व्यापारियों के दबाव और राष्ट्रव्यापी विरोध के बीच ईरान की टैक्स अथॉरिटी ने सरकार की मंजूरी के बाद राहत पैकेज की घोषणा की। अधिकारियों के मुताबिक, इन फैसलों का मकसद कारोबारियों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करना है।
सरकार के 3 बड़े फैसले
टैक्स अथॉरिटी के प्रमुख ने बताया कि व्यापारियों को राहत देने के लिए तीन अहम कदम उठाए गए हैं:
- टैक्स फाइन में राहत: इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस जारी न करने पर लगने वाले 100 प्रतिशत जुर्माने को एक साल के लिए स्थगित कर दिया गया है।
- VAT नोटिस में बदलाव: वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) से जुड़े नोटिसों में व्यापारियों के पक्ष में संशोधन किया गया है।
- समय सीमा बढ़ाई गई: कार्ड मशीन से निकलने वाली रसीदों को इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस के रूप में स्वीकार करने की अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है।
डॉलर की मार से बाजार बेहा
तेहरान चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख हामिदरेज़ा रस्तेगार ने मौजूदा हालात को “आर्थिक आपदा” बताया है। उनका कहना है कि विदेशी मुद्रा, खासकर डॉलर की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव ने व्यापारियों के बिजनेस मॉडल को पूरी तरह नुकसान पहुंचाया है।
व्यापारियों का आरोप है कि वे जिस कीमत पर सामान बेचते हैं, दोबारा माल खरीदते समय डॉलर महंगा हो जाने के कारण उन्हें अतिरिक्त पैसा अपनी जेब से भरना पड़ता है।
सड़कों पर उतरी आम जनता
महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ गुस्सा अब सिर्फ व्यापारियों तक सीमित नहीं रहा। तेहरान की सड़कों पर आम नागरिक भी बढ़ती कीमतों और गिरती क्रय शक्ति के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस और दीर्घकालिक नीतियां नहीं अपनाता, तब तक सरकार की ये राहतें केवल अस्थायी समाधान साबित होंगी।
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