सबा फिरदौस

देश में पीने के पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इंदौर में दूषित पानी से 15 लोगों की मौत और सैकड़ों के बीमार पड़ने की घटना के बाद अब दो और बड़े शहर जल प्रदूषण की चपेट में आ गए हैं। गुजरात की राजधानी गांधीनगर और कर्नाटक की आईटी सिटी बेंगलुरु में नलों से साफ पानी की जगह सीवेज मिलने से चिंता गहराती जा रही है।

गांधीनगर में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बताए जा रहे हैं। यहां 257 करोड़ रुपये की 24×7 जलापूर्ति योजना की हकीकत सामने आने के बाद प्रशासन कटघरे में है। शहर के सेक्टर 24, 26, 28 और आदिवाड़ा इलाकों में अचानक टाइफाइड के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 70 लोग टाइफाइड से संक्रमित पाए गए हैं, जिनका सीधा संबंध दूषित जलापूर्ति से बताया जा रहा है।

जांच में खुलासा हुआ है कि पानी और सीवर की पाइपलाइनों को बेहद नजदीक बिछाया गया था। दबाव बढ़ते ही कई जगह पाइप फट गए, जिससे गटर का पानी पीने की सप्लाई में मिल गया। अब तक सात लीकेज पॉइंट चिन्हित किए जा चुके हैं, जो बड़ी प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करते हैं।

वहीं बेंगलुरु के लिंगराजपुरम इलाके के केएसएफसी लेआउट में भी स्थिति डरा देने वाली है। बीते कुछ महीनों से यहां के लोग पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे। जब निवासियों ने अंडरग्राउंड टैंक की सफाई कराई तो उसमें बदबूदार झाग वाला पानी और सीवेज की मोटी परत मिली। मजबूरी में 30 से 40 परिवार पिछले एक हफ्ते से निजी टैंकरों से पानी खरीद रहे हैं।

बेंगलुरु जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड ने यह स्वीकार किया है कि पीने के पानी में सीवेज मिल रहा है, लेकिन अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि रिसाव किस जगह से हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी अंदाज़े से सड़कें खोद रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

गांधीनगर नगर आयुक्त जे.एन. वाघेला का कहना है कि लीकेज को ठीक किया जा रहा है और सुपर क्लोरीनेशन के ज़रिए हालात जल्द काबू में लाए जाएंगे। हालांकि इंदौर जैसी त्रासदी के बाद लोगों में डर बना हुआ है और प्रशासन की तैयारियों पर भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

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