शाइस्ता आज़मी
(24/12/25)
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार अरावली पर्वत श्रृंखला में खनन को लेकर एक जिलेवार योजना तैयार कर रही है, जिसके तहत यह तय किया जाएगा कि किन जिलों और इलाकों में खनन की अनुमति दी जा सकती है और किन क्षेत्रों को पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह जानकारी दी।मंत्री ने कहा कि अरावली देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और इसका संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य खनन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि अवैध खनन पर रोक लगाना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है।जिलेवार डिमार्केशन की मुख्य बातें
अरावली क्षेत्र में खनन योग्य और गैर-खनन योग्य इलाकों को वैज्ञानिक आधार पर चिन्हित किया जाएगा।
यह काम सतत खनन प्रबंधन योजना (Sustainable Mining Management Plan) के तहत होगा।
वन, जल स्रोत, वन्यजीव क्षेत्र और पर्यावरण-संवेदनशील इलाकों में खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
केवल सीमित और गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में ही सख्त नियमों के तहत खनन की अनुमति दी जाएगी।केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र में संभव होगा खनन
पर्यावरण मंत्री ने बताया कि अरावली के कुल क्षेत्रफल का केवल लगभग 0.19 प्रतिशत हिस्सा ही ऐसा है, जहाँ सभी पर्यावरणीय मंजूरियों के बाद खनन संभव हो सकता है। इसके अलावा किसी भी क्षेत्र में नया खनन पट्टा तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक जिलेवार योजना पूरी तरह लागू नहीं हो जाती।भ्रामक प्रचार पर सरकार की सख्ती
भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली को लेकर फैलाया जा रहा यह दावा गलत है कि सरकार खनन खोलना चाहती है। उन्होंने कहा,
“सरकार अरावली की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी कीमत पर इसके पर्यावरणीय नुकसान की अनुमति नहीं दी जाएगी।”दिल्ली-एनसीआर पर विशेष ध्यान
सरकार ने यह भी साफ किया कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में खनन पर सख्त प्रतिबंध जारी रहेगा, क्योंकि यह क्षेत्र वायु गुणवत्ता और जल संरक्षण के लिहाज से बेहद अहम है।
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